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2024 (1) TMI 1449

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..... 2366;ंक 11.07. 16 पर आधारित अधीनस्थ न्यायालय में लंबित परिवाद संख्या 12/18 व 10/21 अपराध अंतर्गत धारा 3/4 धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (जिसे आगे ''अधिनियम-2002''कहा जावेगा) में अपनी नियमित जमानत हेतु यह जमानत प्रार्थना पत्र दण्ड प्रक्रिया स .....

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..... ; अभियुक्त को नहीं थी, स्वयं प्रार्थी/अभियुक्त के साथ भरत बम्ब व अन्य व्यक्तियों द्वारा धोखा किया गया था जिसकी प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या 25. 02.2016 को ही दर्ज करवा दी गयी थी। अभियुक्त का कोई आपराधिक दुराशय इस मामले .....

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..... यालय द्वारा प्रसंज्ञान नहीं लिया गया था। प्रेडिकेट/ शिड्यूल अपराध में सीबीआई द्वारा उसे गवाह के रूप में रखा गया है, उसे मामले में अभियुक्त नहीं माना गया है। प्रथमदृष्टया अभियुक्त निर्दोष है, अभियुक्त द्व& .....

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..... ;ित राशि को साफ सुथरी राशि बताने हेतु योजनाबद्ध तरीके से व षडयंत्रप ूर्वक ग्रीन सीमेंट के लाईसेंस आदि के संबंध में अनुबंध किये गये हैं। अभियुक्त निर्दोष हो, ऐसा तथ्य किसी भी रूप में प्रकट नहीं हो रहा है। अधि .....

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..... ित निर्णय दौलतसिंह बनाम राजस्थान राज्य 2015(2) क्राइम्स 695 (राज0) पर आधारित किया है। 5. यह भी निवेदन किया कि कलुषित राशि साफ सुथरी राशि है, इस तथ्य को सिद्ध करने का भार अधिनियम, 2002 की धारा 24 के अनुसार अभियुक्त पर है जिसे अभिë .....

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..... ;यम से अस्वीकार कर दी गयी थी। अभियुक्त द्वारा बार बार न्यायिक प्रक्रिया का दुरूपयोग किया जा रहा है। अंत में अपराध की गंभीरता को देखते हुए यह जमानत आवेदन खारिज किए जाने का निवेदन किया गया। 6. दोनों पक्षों के तर .....

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..... 6;ध कारित किया गया तथा 1055.79 करोड रूपये की कलुषित राशि का धनशोधन अभियुक्तगण द्वारा किया गया जिसमें आरोप पत्र पेश हो चुका है। यह बात सही है कि सीबीआई द्वारा प्रस्तुत उपरोक्त आरोप पत्र में वर्तमान अभियुक्त/प्रारî .....

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..... #2332;्ञान नहीं लिया गया था। अधिनियम, 2002 की धारा 19 में यह प्रावधान है कि अधिनियम में वर्णित अधिकारीगण को सामग्री के आधार पर यह विश्वास किये जाने के आधार होने पर कि किसी भी व्यक्ति के द्वारा अधिनियम में वर्णित कोई अप .....

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..... ;फ्तारी को एस बी क्रिमिनल मिसलेनियस पीटीशन नंबर 11157/2022 के माध्यम से चुनौती दी गयी थी, लेकिन यह याचिका दिनांक 22.09.2023 के आदेश के माध्यम से खारिज हो चुकी है। 9. वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि मुख्य अभियुक्त भरत बमî .....

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..... ;डी की घटना वर्ष 2013 से काफी पहले हो चुकी थी जिसमें मुख्य अभियुक्त भरत बम्ब की भी भूमिका पायी गयी है तथा भरत बम्ब आदि से अभियुक्त द्वारा यह राशि बैंक संव्यवहार से प्राप्त की जाकर अचल संपत्तियां अर्जित करने का आë .....

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..... ; धारा 45 के प्रावधान सुसंगत है, जो निम्नानुसार हैः- Offences to be cognizable and non-bailable. (1) [Notwithstanding anything contained in the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974), no person accused of an offence [under this Act] shall be released on bail or on his own bond unless--] (i) the Public Prosecutor has been given an opportunity to oppose the application for such release; and (ii) where the Public Prosecutor opposes the application, the court is satisfied that there are reasonable grounds for believing that he is not guilty of such offence and that he is not likely to commit any offence while on bail............ 11. विद्वान अधिवक्ता अभियुक्त का निवेदन है कि धारा 45 अधिनि .....

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..... 50;हाराष्ट्र राज्य (2005) 5 एस सी सी 294 प्रस्तुत किये हैं। 13. विद्वान अधिवक्ता अभियुक्त का एक तर्क यह भी रहा है कि अधिनियम, 2002 की धारा 45 के प्रतिबंध के संबंध में अभियुक्त निर्दोष ही हो, यह अंतिम निष्कर्ष निकाला जाना इस स्टेé .....

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..... सी ऑनलाईन एस सी 1004, रबी प्रकाश बनाम उडीसा राज्य 2023 एस सी सी ऑनलाईन एस सी 1109, क्रिमिनल अपील नंबर 1293/22 एम डी राजा व अन्य बनाम पश्चिम बंगाल राज्य में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 22.08.2022, बच्चू यादव बनाम प .....

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..... ा कि अधिनियम, 2002 की धारा 45 व एनडीपीएस एक्ट, 1985 की धारा 37 के प्रावधान अक्षरशः एक ही है तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय की वहृद पीठ द्वारा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो बनाम मोहित अग्रवाल ए.आई.आर. 2020 एस.सी. 3444 के मामले में यह व्य .....

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..... S Act. 19. As a result of the aforesaid discussion, the present appeals are allowed and the impugned order releasing the Respondent on post-arrest bail, is quashed and set aside. The bail bonds of the Respondent are cancelled and he is directed to be taken into custody forthwith.'' 15. यह बात सही है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कुछ मामलों में अधिनियम, 2002 की धारा 45 अथवा एनडीपीएस एक्ट, 1985 की धारा 37 के प्रावधानों के बावजूद संपूर्ण न्याय किय .....

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..... ीय संविधान के अनुच्छेद 142(1) के तहत प्रदत्त असाधारण अधिकारिता के तहत पारित किया जा सकता है, पंरतु ऐसी अधिकारिता या शक्तियां उच्च न्यायालय या विचारण न्यायालय को उपलब्ध नहीं है। उपरोक्त न्यायिक दृष्टान्त का स .....

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..... 81;वारा प्राप्त राशि कलुषित राशि नहीं हो अथवा उसे अपराध के आगम की जानकारी नहीं हो और वह निर्दोष हो, यह तथ्य प्रकट नहीं हुए हैं। अभियुक्त द्वारा जो बचाव लिये गये हैं, वे विचारण का विषय हो सकते हैं। अभियुक्त अथवा ç .....

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..... राशि है तथा ग्रीन सीमेंट के लाईसेंस का अनुबंध मात्र धनशोधन के लिए दिखावटी रूप में निष्पादित हुआ है और इन समस्त परिस्थितियों को विचार में लिये जाने के बाद विचारण न्यायालय द्वारा अभियुक्त के विरूद्ध दिनां& .....

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..... 40; अपराध में विहित अधिकतम कारावास की अवधि की आधी अवधि अभियुक्त ने अभिरक्षा में भुगत ली हो, ऐसी स्थिति भी नहीं है, अतः धारा 436ए दण्ड प्रक्रिया संहिता के प्रावधान भी इस मामले में लागू नहीं होते हैं। 18. जमानत आवेदन कí .....

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..... #2346;ोर्ट बनाकर पलायन के पयास का भी आरोप रहा है। अभियुक्त का यह आचरण भी जमानत आवेदन निस्तारण किये जाते समय विचार में लिये जाने योग्य है। 19. विद्वान अधिवक्ता अभियुक्त का एक निवेदन यह भी रहा है कि अन्य सह अभियुक्तग& .....

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..... 44;िवेदन रहा है कि सह अभियुक्तगण को जो जमानत की सुविधा दी गयी है उसे निरस्त कराने हेतु ऊपरी न्यायालय में चुनौती दिये जाने का निर्णय लिया गया है। 20. उपरोक्त विवेचनानुसार दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत तर्कों, वì .....

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..... 339;ामतः प्रार्थी-अभियुक्त हिमाशं उर्फ हिमांशु वर्मा पुत्र कवंर अजय वर्मा द्वारा प्रस्तुत यह जमानत प्रार्थना पत्र खारिज किया जाता है। Hindi to English translated by Google ORDER This bail application has been filed under Section 439 of the Code of Criminal Procedure on behalf of the applicant-accused for his regular bail in complaint number 12/18 and 10/21 under section 3/4 of the Prevention of Money Laundering Act, 2002 (hereinafter referred to as the "Act-2002") pending in the subordinate court based on ECIR number JPZO/01/2016 dated 1 .....

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..... f the Indian Constitution, stating that the High Court does not have such jurisdiction, the decision passed by the division bench of this court in Daulat Singh vs. State of Rajasthan 2015 (2) Crimes 695 (Raj0) has been based on the decision passed by the division bench of this court. 5. It was also submitted that the burden of proving that the tainted amount is clean amount is on the accused as per Section 24 of the Act, 2002, which the accused has not been able to prove at present. This can be a matter of consideration. The accused has acquired more than one immovable property from the tainted amount, which has been attached by the Directorate. The accused had filed SB Criminal Miscellaneous Petition No. 11157/2022 under Section 482 of the Code of Criminal Procedure, calling his arrest illegal and in fact, in continuation of the bail, which was rejected through order dated 22.09.2023. The accused is repeatedly misusing the judicial process. Finally, in view of the gravity of the crime, it was requested to dismiss this bail application. 6. Perused the material available on record in the context of the arguments of both the sides and considered the facts and circumstances of the c .....

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..... of acquiring immovable properties by receiving this amount from Bharat Bamb etc. through bank transactions. The other main accused Anoop Bharatriya is accused of investing the above amount in World Trade Park, in which also the accused is accused of purchasing premises for some offices by taking loan from Syndicate Bank. Although the accused has denied this, but at present the above premises have been confiscated and the trial on this point is yet to be conducted. 10. The provisions of section 45 are relevant while granting bail in cases of offences specified in the 2002 Act, which are as follows:- Offences to be cognizable and non-bailable. (1) [Notwithstanding anything contained in the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974), no person accused of an offence [under this Act] shall be released on bail or on his own bond unless--] (i) the Public Prosecutor has been given an opportunity to oppose the application for such release; and (ii) where the Public Prosecutor opposes the application, the court is satisfied that there are reasonable grounds for believing that he is not guilty of such offence and that he is not likely to commit any offence while on bail............ .....

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..... hat a charge sheet has been filed or the fact of the period of custody is irrelevant. Para Nos. 18 and 19 of the above judicial precedent are relevant, which reads as under:- ''18. In our opinion the narrow parameters of bail available Under Section 37 of the Act, have not been satisfied in the facts of the instant case. At this stage, it is not safe to conclude that the Respondent has successfully demonstrated that there are reasonable grounds to believe that he is not guilty of the offence alleged against him, for him to have been admitted to bail. The length of the period of his custody or the fact that the chargesheet has been filed and the trial has commenced are by themselves not considerations that can be treated as persuasive grounds for granting releif to the Respondent Under Section 37 of NDPS Act. 19. As a result of the aforesaid discussion, the present appeals are allowed and the impugned order releasing the Respondent on post-arrest bail, is quashed and set aside. The bail bonds of the Respondent are cancelled and he is directed to be taken into custody forthwith.'' 15. It is true that in some cases the Hon'ble Supreme Court has granted bail de .....

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..... hority exercised under Article 142 of the Constitution of India, thus, is not having a binding effect or in other words, an authority of precedent for the High Court or the other courts subordinate. The judgments given in the case of Dadu alias Tulsidas v. State of Maharashtra (supra) and Rattan Mallik (supra) are laying down law, hence, are having binding effect and those are required to be adhered in their true spirit." 16. In the present case, it has not been revealed that the amount received by the accused is not tainted money or he is not aware of the proceeds of crime and he is innocent. The defences taken by the accused can be a subject of consideration. The accused or the companies controlled by him have received a total of Rs 85.12 crores through Bharat Bamb etc. These companies controlled by the accused/applicant have also been fake and disputed, Rs 58.72 crores is still outstanding against the accused/applicant. During the investigation, the statement of Bharat Bamb was recorded before the Enforcement Directorate, this statement is admissible in evidence and on this basis also it is alleged that in reality the amount transferred to the accused/applicant is tainted money .....

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